| Pics Credit: Gratisography |
एक-एक पल से जुड़ती है,
कुछ मीठी कुछ खट्टी होती है ज़िन्दगी,
बेस्वाद बरस होक क्या जीना
प्यार झूठा ही सही क्यों डरना।
सच्चे तो बस बच्चे होते है
बाकियों से कोई उम्मीद न रखना,
ऐसे तोह मिलते हैं कई मुसाफिर
किस्म अलग सी हर एक की मगर।
खैर खुदा की तेरा एहसान मुझपे
अहसास कराया मुझे हर वक़्त,
कि दिखा दिए तूने रंग सारे
मेरे अकेले भर की इस एक ही ज़िन्दगी में।

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