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| Pics credit: Joy Deb |
मर के हम फिर ज़िंदा हुए है,
डूब के शराब से पार हुए हैं,
आज बेवफाओं से जुड़ा हुए और ,
चाहनेवालों के आसपास हुए हैं।
मीठी लगती है अब हवा की महक,
सूनी सी है अब यह झलक,
करते नहीं है अब कोई चिंता,
जी लेते हैं ज़रुरत से भी ज़्यादा।
अब आगे बढ़ने के हैं कई रस्ते,
उन रास्तों पे है ठंडी छाया ,
हम चले जायेंगे उस पथ पर देखना,
और तुम सोचोगे की खो गए हम कहाँ,
पर जब देखोगे उडाता हुआ हमारा वह झंडा,
सोचोगे कभी इस शख्स से भी हुआ था प्यार तुम्हारा।


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