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| Pic: Freestock.org |
तेरा इश्क़ सताए, बेमौत जलाये,बर्बाद करे,साज़िश रचाये,
लेके रुत रुख तूफ़ान की,तेरा इश्क़ सताए सब कुछ भुलाये।
अरण्य सी जंजाल ऐसी ज़िन्दगी, कोई पानी कहीं न बरसी,
प्यासी यह भूमि,हर पत्ता हर प्राणी वीरान-वैरागी।
ऐसी रूखी ,बरस ज़िन्दगी,रंजिश रिश्तों की,खता सांसों की,
महरूम करे,बेमौत जलाये,तेरा इश्क़ सताए, तेरा इश्क़ सताए।
वह उठा सूरज कल भी आज भी, रोशन करे हर समां और श्रेणी,
दिल उज्जवल करे मगर जो अहसास,इस घाम में कहाँ अब वह अंदाज़।
क़त्ल हुआ है आज लेकिन, दिल के शामियाने में नहीं और कोई हो शामिल,
कोई लाश आये यहाँ पे, मुर्दादिली को कर दे मुकम्मल ही साहिल।
जल चुके हैं चिटा कितने, सुर्ख वादियों के इस आशियाने में
पर जाता नहीं जो है वह कम्बख्त दर्द है, मरे जम्मातो के जलाने से।
आज तक यह सितम्ब हम पर रूकती नहीं, और इश्क़ तेरी जाती नहीं,
मरवाती रही बेहद बेरुख, तेरा इश्क़ सताए, तेरा इश्क़ सताए।
तेरा इश्क़ सताए, बेमौत जलाये,बर्बाद करे,साज़िश रचाये,
लेके रुत रुख तूफ़ान की,तेरा इश्क़ सताए सब कुछ भुलाये।
अरण्य सी जंजाल ऐसी ज़िन्दगी, कोई पानी कहीं न बरसी,
प्यासी यह भूमि,हर पत्ता हर प्राणी वीरान-वैरागी।
ऐसी रूखी ,बरस ज़िन्दगी,रंजिश रिश्तों की,खता सांसों की,
महरूम करे,बेमौत जलाये,तेरा इश्क़ सताए, तेरा इश्क़ सताए।
वह उठा सूरज कल भी आज भी, रोशन करे हर समां और श्रेणी,
दिल उज्जवल करे मगर जो अहसास,इस घाम में कहाँ अब वह अंदाज़।
क़त्ल हुआ है आज लेकिन, दिल के शामियाने में नहीं और कोई हो शामिल,
कोई लाश आये यहाँ पे, मुर्दादिली को कर दे मुकम्मल ही साहिल।
जल चुके हैं चिटा कितने, सुर्ख वादियों के इस आशियाने में
पर जाता नहीं जो है वह कम्बख्त दर्द है, मरे जम्मातो के जलाने से।
आज तक यह सितम्ब हम पर रूकती नहीं, और इश्क़ तेरी जाती नहीं,
मरवाती रही बेहद बेरुख, तेरा इश्क़ सताए, तेरा इश्क़ सताए।


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